रतन टाटा जी से सीखिए time management के गुण

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आज की तरीक में पृथ्वी पर सबसे कीमती चीज़ है समय | समय के अलावा जीवन में जो भी चीज़ है या जो भी वस्तु है जो हमने गवा दी है वो वापस आ सकती है | लेकिन समय एक ऐसी चीज़ है जो कभी वापस नहीं आता | जिसने अपनी जिंदगी में टाइम मैनेजमेंट की कला सीख ली वो अपने जीवन में बहुत आगे जाता है और उस व्यक्ति को सफल होने से कोई भी नहीं रोक सकता | 

रतन टाटा जो कि एक जाना माना नाम है | शायद ही भारत में कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो रतन टाटा को नहीं जानता होगा | टाइम मैनेजमेंट की कला में रतन टाटा जी बहुत ही निपुण हैं | पूरे Tata Group में कुल मिलकर 80 कंपनियां है और लगभग 15 – 16 कंपनियां तो Fortune 500  कंपनियों की लिस्ट में भी है | अब हर कंपनी की AGM (Annual General Meeting) भी साल में 1 बार तो होती होंगी | इसके साथ Board Meetings और भी दूसरी meetings भी होती होंगी | लेकिन रतन टाटा जी सारी meetings को और अपनी इतने बड़े group को कैसे संभालते होंगे ? इसके एक सीधा सा उत्तर है टाइम मैनेजमेंट | दोस्तों आपको ये जानकर हैरानी होगी कि रतन टाटा जी एक साथ 4 board meetings को संभालते थे | रतन टाटा जी का दिमाग इतना तेज़ था कि 4 board meetings में 4 अलग अलग विषयों पर चर्चा होती है और रतन टाटा जी चारों meetings को बहुत अच्छी तरह से manage करते हैं | रतन टाटा जी जब office जाने के लिए अपने घर से निकलकर अपनी गाडी में उस दिन की meeting वाली फाइल को देखते हैं और तब वो जान पाते हैं कि उस दिन की meeting का विषय क्या है | और तो और एक बार रतन टाटा जी ने meeting के विषय में पढ़ लिया तो दोबारा उन्होंने उस फाइल को देखने की जरूरत नहीं पड़ती थी न meeting से पहले और न ही meeting के बाद | इसी कला को work efficiency और टाइम मैनेजमेंट कहते हैं |

अब रतन टाटा जी इतने बड़े group को चलते हैं तो जाहिर सी बात है उकने पात बहुत सारी चिट्ठियां भी आती होंगी | जी हाँ उनके पास एक दिन में लगभग 200 चिट्ठियां आती है और उन्हें सभी के जवाब भी देने पड़ते हैं | और ये बात रतन टाटा जी बहुत ही अच्छी तरह से जानते हैं की 200 चिट्ठियों का जवाब देने और उनपे साइन करने में कम से कम 2 घंटे बर्बाद होंगे | इसीलिए सभी चिठियों को पढने के लिए उन्होंने 3 – 4 स्टाफ अलग से रखे हुए हैं जो सारी चिट्ठियों को पढ़कर उसके जरूरी चीजों को hilight करके रतन टाटा जी को तब बताते हैं जब रतन टाटा जी अपने केबिन से लंच के लिए जा रहे हो या फिर अपने केबिन से रेस्ट रूम जा रहे हो या फिर अपने केबिन से अपनी car की तरफ जा रहे हों | ऐसे इसलिए ताकि वो अपने कीमती समय को manage कर सकें | रतन टाटा जी ने एक रूम में लगभग 20 ड्राफ्ट मशीन लगवाई है ताकि वो एक बार में 20 चिट्ठियों पर साइन कर सके और उका समय भी बचे और ये काम भी तब करते हैं जब वो रेस्ट रूम जा रहे हों या फिर रेस्ट रूम से आ रहे हों |     

अगर आपको टाइम मैनेजमेंट की कला सीखनी है ती रतन टाटा जी से सीखो |  दोस्तों यही कारण है कि आज रतन टाटा जी इतने सफल व्यक्ति हैं | हमे रतन टाटा जी से बहुत कुच्छ सीखना चाहिए जो की हमारे जीवन में बहुत काम आएगा | 


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