शुक्र निति

गुरु शुक्राचार्य के अनुसार ये 9 बातें हमेशा गुप्त रखनी चाहिए

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मित्रों गुरु वो होता है जो हमारे जीवन को अन्धकार से प्रकाश की ओर ले जाता है। ये तो आप जानते ही हैं कि देवताओं के गुरु बृहस्पति थे और असुरों के गुरु शुक्राचार्य थे।

बात करें शुक्राचार्य की तो वो एक महान ज्ञानी होने के साथ साथ एक अच्छे नीतिकार भी थे। उन्होंने एक नहीं बल्कि कई बार अपनी सूझ बूझ से असुरों को स्वर्ग का राज पाठ दिलाया था। गुरु शुक्राचार्य की कई बातें ऐसी है जो आज भी बहुत महत्व रखती है। क्यूंकि इन्होने जीवन को लेके ऐसी महत्वपूर्ण बातें बताई थी जिनका पालन करने से मनुष्य खुश भी रहेगा और उसे सफलता भी मिलेगी। चलिए जानते हैं कुच्छ ऐसी बातें जो गुरु शुक्राचार्य के अनुसार जीवन में हमेशा गुप्त रखना चाहिए। अन्यथा इसकी बहुत ही भारी कीमत चुकानी पद सकती है।

1.  आयु

दैत्य गुरु शुक्राचार्य ने अपनी निति में कहा है कि किसी भी मनुष्य को अपनी आयु गुप्त रखनी चाहिए और जहाँ तक संभव हो इसे किसी के भी सामने आसानी से जाहिर नहीं होने देना चाहिए। ऐसा इसीलिए क्यूंकि आपकी सही आयु जानने से बहुत से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष शत्रु आपकी क्षमता और कौशल का सही अंदाजा लगाकर अवसर आने पर आपको हानि पहुंचा सकते हैं।

2.  धन

इसे दुनिया में अक्सर ऐसा देखा जाता है की लोग दूसरों की कमाई पर अपनी नज़रें गड़ाई रखते हैं और ये जानने की कोशिश में लगे रहते हैं की आपके पास कितना धन है। इस संबध में दैत्य गुरु का कहना है कि भले ही आपके पास धन दौलत की भरमार हो और भले ही आप सभी सुख सुविधाओं से संपन्न हो इसके बाद भी अपने परिवार के अलावा इस बात की जानकारी आपको किसी को भी नहीं देनी चाहिए। इसीलिए अगर आपके पास ज्यादा धन भी हो तो उसका दिखावा नहीं करना चाहिए और जितना हो सके गुप्त ही रखना चाहिए। क्यूंकि दोस्तों भले ही कोई आपका सबसे करीबी सम्बन्धी ही क्यूँ न हो, एक बार किसी काले मन के व्यक्ति को आपके धन की जानकारी हो गयी तो वो उस धन को हड़पने की कोशिश में लग सकता है।

3.  पारिवारिक भेद

आपने बहुत से लोगों को देखा होगा जो अपने परिवार के दुःख और दिक्कतों का रोना अन्य लोगों के सामने रोने लग जाते हैं। पर ऐसे लोग बाद में बहुत पछताते हैं। क्यूंकि जिनके सामने आप ये रोना रो रहे हो वो विश्वास पात्र हो ये जरूरी नहीं। इसीलिए गुरु शुक्राचार्य ने अपनी निति में बताया है कि आपको किसी भी परिस्थिति में अपने पारिवारिक भेदों को किसी के भी सामने प्रकट नहीं होने देना चाहिए। क्यूंकि इससे आपके परिवार की प्रतिष्ठा तो खराब होती ही है साथ ही साथ लोग इस बात का लाभ उठाके आपके घर में कलेश भी उत्पन्न कर सकते हैं और ऐसी स्थिति में आपको निश्चित ही हानि उठानी पड सकती है।

4.  मंत्र और कृपा

इस संसार में हर व्यक्ति सफलता के लिए लालायित रहता है और वो किसी न किसी रूप में परमात्मा की कृपा पाने के लिए सुबह शाम प्रार्थना और पूजा पाठ में लगा रहता है। कई लोग इसके लिए किसी विशेष गुरु को मानते हैं तो कई लोग विशेष प्रकार की पूजाएँ और मंत्रों का जप भी करते हैं। इस संधर्भ में गुरु शुक्राचार्य का कहना है कि कोई भी पूजा या मंत्र तभी फलदायी होता है जब उसे गुप्त रूप से संपन्न किया जाए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो इसके गंभीर परिणाम भी भुगतने पड सकते हैं।

5.  अतरंग पल

कई लोग हंसी मज़ाक में अपने जीवन की बेहद निजी बातों को भी मित्रों और रिश्तेदारों के साथ साझा कर देते हैं। लेकिन ऐसा कभी भी नहीं करना चाहिए। शुक्र निति में बताया गया है कि मनुष्य को अपने अतरंग पलों की चर्चा किसी के भी समक्ष भूल कर भी नहीं करनी चाहिए। यही मर्यादित लोगों की निशानी है। यदि फिर भी कोई मनुष्य ऐसा करता है तो जीवन में कभी न कभी उसे शर्मसार होना पड़ सकता है। और वो मनुष्य दुसरे लोगों के समक्ष उपहास का पात्र बन के रह जाता है।

6.  औषधि

शुक्र निति में ये भी कहा गया है कि यदि आपको कोई रोग है और उससे बचाव के लिए आप किसी प्रकार की औषधि या दवाई लेते हैं तो ये बहुत ही जरूरी है कि आप अपनी औषधि को गुप्त रखें। अन्यथा ऐसे लोग जो आपसे मन ही मन शत्रुता रखते हैं वो औषधि के सहारे आपके रोग की पहचान कर लेंगे और फिर गलत तरीकों से आपके लिए समस्याएं खड़ी कर सकते हैं। इसीलिए जहाँ तक भी संभव हो अपने दवा और रोग के बारे में जानकारी अपने डॉक्टर और घर के सदस्यों के अलावा किसी से भी साझा न करें।

7. दान

बहुत सारे लोग ऐसे होते हैं जो किसी को दान देने के बाद उसका ढिंढोरा पीटते है जबकि ऐसा करना उचित नहीं है। आप तो जानते ही होंगे कि अपने सनातन धर्म में दान का कितना महत्त्व है। दान देने से न केवल आपको इश्वर का आशीर्वाद प्राप्त होता है बल्कि इससे आपके कष्ट और रोग भी दूर होने लगते हैं। लेकिन शुक्राचार्य जी कहते हैं कि दान ऐसा पुन्य कर्म है जो किसी भी दशा में गुप्त रूप से होना चाहिए तभी इनका पुन्य फल प्राप्त होता है। अन्यथा दान करना व्यर्थ ही चला जाता है। अगर आपने किसी जरूरतमंद को दान दिया है तो वो आपको सच्चे दिल से दुआ देगा। लेकिन अगर आपने उसका प्रदर्शन कर दिया तो उसके मन को बहुत ठेस पहुँचती है जो आपके लिए भी अच्छा नहीं है। इससे आपका दान व्यर्थ हो जाता है और आपके किये हुए दान का कोई फल नहीं मिलता है।

8.  सम्मान और प्रशंशा

समझदार लोग कभी भी अपने मान सम्मान का बखान दुसरे लोगों के सामने नहीं करते। लेकिन फिर भी जो कोई मनुष्य अपनी प्रशंशा अपने ही मुंह करता है वो अन्य लोगो के लिए भी अपना ही आदर खो देता है। और मित्र बनाने के चक्कर में लोगो से उलटा दुश्मनी कर लेता है। इसीलिए ये बहुत ही जरूरी है कि आप स्वयं ही उन लोगो को अपनी समझ के अनुसार खुद को परखने का अवसर दें, तभी लोग आपके सच्चे प्राणशक हो सकेंगे।

9.  अपमान

जैसा कि हम जानते हैं कि हमें कभी भी अपने मान सम्मान के बारे में नहीं बताना चाहिए। ठीक उसी प्रकार से हमें अपने अपमान का बखान भी दुसरे लोगों के सामने नहीं करना चाहिए। लेकिन फिर भी शुक्र निति से अनजान कोई मनुष्य ऐसा करता है तो लोग उसके कष्ट को दूर करने की बजाये उसका मज़ाक ही उड़ाने लगते हैं।

दोस्तों आप भी अगर गुरु शुक्राचार्य की इन 9 बातों को गुप्त रखेंगे तो इस बात की संभावना अधिक है कि आपको सफलता भी प्राप्त होगी और आपके जीवन में शान्ति भी बनी रहेगी।

यदि आप महाबली रावण के जीवन के कुछ अद्बुत और अनसुने रहस्यों के बारे में जानना चाहते हैं तो नीचे दिए button पर click करें


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