!! कैसे एक राजा का बेटा बना गौतम बुद्ध !!

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दुनिया में अलग अलग समय पर एक से बढ़ कर एक महान व्यक्ति होते रहे हैं | उनमे से एक महान व्यक्ति थे गौतम बुद्ध | गौतम बुद्ध ने सभी तरह के सुख और सुविधाओं का त्याग करके दूसरों को सही मार्ग दिखाया | अपने महान विचारों के दम पर गौतम बुद्ध ने दुनिया में अनेक परिवर्तन लाये | उन्होंने हमेशा से ही सत्य और अहिंसा को अपने जीवन का आधार माना और उन्होंने दूरसों को भी सदैव इसी रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित किया | आपको यह जानकार हैरानी होगी कि गौतम बुद्ध एक राज परिवार में जन्मे थे और उन्हें कभी भी किसी चीज़ की कमी नहीं हुई | वो जो भी चाहते थे वो उनको मिल जाता था | इसके बावजूद दिव्य ज्ञान की खोज में उन्होंने इन सभी सामाजिक सुखों को त्याग दिया और अपने महान विचारों को बाटते हुए भगवान का दर्ज़ा प्राप्त किया | आज हम जानेंगे महात्मा बुद्ध की पूरी कहानी |

गौतम बुद्ध का जन्म लगभग 563 ईo पूर्व नेपाल में लुम्बिनी (Lumbini) नामक स्थान पर हुआ था | उनके बचपन का नाम सिद्धार्थ गौतम था और वो राजा शुद्धोदन और रानी महामाया देवी के घर में पैदा हुए थे | उस समय की परंपरा थी कि जब भी बच्चों का जन्म करीब होता था महिलाऐं अपने माइके आ जाती थी | लेकिन जब महारानी अपने माइके आ ही रही थी तभी रास्ते में ही गौतम बुद्ध के जन्म का समय आ गया और इसी तरह लुम्बिनी, नेपाल में एक पेड़ के नीचे गौतम बुद्ध का जन्म हो गया | उनके जन्म के 7 दिन बाद ही उनकी माँ की मृत्यु हो गयी थी | जब बुद्ध जी को राजा के पास लेजाया गया तो बड़े ही रीती रिवाजों के साथ बच्चे के नाम सिद्धार्थ रखा गया | जब इनका नामकरण हो रहा था तब कई साधू संत आये थे | कई साधुओं ने यह भविष्यवाणी करी कि ये बच्चा बड़ा होकर एक महान राजा बनेगा और कई साधुओं ने कहा की यह एक सन्यासी बनेगा | वहीं 12 साल का एक ज्योतिषी था कुदन्ना | उसने स्पष्ट तौर पर राजा को बोल दिया कि “हे राजन आपका पुत्र सब छोड़ छाड़कर एक सन्यासी बन जायेगा” | तभी राजा बहुत चिंतित हो गए कि बुढ़ापे में तो एक पुत्र हुआ है अगर ये सन्यासी हो जायेगा तो मेरा राज पाठ कौन देखेगा | तो ज्योतिष ने कहा की इसे कभी दुःख का एहसास मत होने देना क्यूंकि जब भी इसे दुःख का एहसास होगा ये संन्यास की ओर चला जायेगा | इसे घर में ही सारे ऐशो आराम दो | बूढ़े व्यक्ति को, मृत शय्या को इससे दूर रखो | इसके बाघ में सभी खिले हुए और रंग बिरंगे फूल होने चाहिए | कोई भी सूखा पत्ता या फिर मुरझाया हुआ फूल इसके बाघ में नहीं होना चाहिए क्यूंकि ये सब चीजें इसे संन्यास की ओर आकर्षित करेंगी | सिद्धार्थ की माँ की मृत्यु के बाद उनका पालन पोषण उनकी मौसी महाप्रजापति गौतमी ने किया | सिद्धार्थ के पिता उनको बचपन से ही एक महान राजा बनाना चाहते थे | यही कारण था की उन्होंने सिद्धार्थ को बचपन से ही धार्मिक ज्ञान से दूर ही रखा | लेकिन सिद्धार्थ बचपन से ही काफी दयालु थे और वो किसी को भी दुःख नहीं पहुंचाना चाहते थे | यहाँ तक कि वे खेलते समय भी जान बूझ कर खुद ही हारे जाते थे | यही दयालुता के कारण सिद्धार्थ बाकी लोगो से अलग थे | सिद्धार्थ जब 16 साल के थे तब उनकी शादी राजकुमारी यशोधरा से कर दी गयी | बस उसी समय से वो कई सारे धार्मिक सवालों के जवाब ढूँढने लगे | अपने युवा अवस्था में जब वो बहार निकलकर जनता के बीच गए, तब अपनी इस यात्रा में उन्होंने बीमारी, बुढापा और सांसारिक दुखों के बारे में बहुत सी ऐसी बातें जानी जिसके बारे में उन्हें कभी भी पता नहीं था | इसके बाद उन्होंने अपने पिता के विरुद्ध जाकर एक रात महल छोड़ने का फैसला ले लिया और बाहर आकर उन्होंने निश्चय किया कि वे दिव्य ज्ञान की प्राप्ति करेंगे |

बस यहीं से शुरू हुई सिद्धार्थ गौतम की गौतम बुद्ध बनने की यात्रा | महल से निकल कर सबसे पहले वे अनोमिया नदी के तट पर पहुंचे जहाँ पहले उन्होंने अपने बाल कटवाए और साधू का वेश धारण किया | और फिर इसके बाद वह राजागाह पहुंचे जहाँ पर वे भिक्षा मांगने लगे | हालांकि भिक्षा मांगने के दौरान ही उस वक़्त मगध के राजा बिम्बिसार और वहां के लोगो ने सिद्धार्थ को पहचान लिया | जब राजा के दरबार में उन्हें लाया गया तब राजा बिम्बिसार ने सिद्धार्थ को रहने के लिए अपने राज्य का कुछ हिस्सा देने की बात कही | लेकिन गौतम बुद्ध को इस सामाजिक लालच से कोई मतलब नहीं था और उन्होंने बिम्बिसार से सहायता न लेने की बात कह दी | वहां से निकालने के बाद गौतम बुद्ध ने योग और meditation की सिक्षा प्राप्त की और काफी सालों तक कठोर तपस्या करने के बाद उन्होंने सही तरीके से ध्यान लगाना शुरु कर दिया | फिर बोधगया पहुँच कर एक पीपल के पेड़ के नीचे बैठ लगातार 49 दिनों तक जब उन्होंने ध्यान लगाया तब उन्हें दिव्य ज्ञान की प्राप्ति हुई | उस समय गौतम बुद्ध की उम्र 35 साल के आस पास थी | इसके बाद से ही 80 साल की उम्र तक वो प्रचार प्रसार करने लगे | इस दौरान उन्होंने अपने कई शिष्य भी बनाये जो उनके दिखाए हुए मार्ग पर चलते रहे | दोस्तों आज भी गौतम बुद्ध के followers की संख्या करोड़ों में है | जिसमे भारत, जापान, कोरिया, चीन और नेपाल जैसे देशों के बहुत सारे लोग आपको देखने को मिल जायेंगे | आज भी गौतम बुद्ध द्वारा बताई गयी बातें लोगों को प्रेरित करती हैं |

अगर आपको राजकुमार सिद्धार्थ के गौतम बुद्ध बनने की कहानी पसंद आई है तो हमें comment करके जरूर बताएं और इस कहानी को जितना ज्यादा शेयर कर सकें उतना करें |


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